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पश्चिम सिंहभूम के रंगलबेड़ा गांव के युवक विकी महतो ने श्री सीमेंट कंपनी पर जमीन के बदले दो पीढ़ियों को नौकरी देने के वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। परिवार ने कंपनी को 5 एकड़ जमीन दी थी।

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जमीन दी, नौकरी का वादा मिला, लेकिन अब दर-दर की ठोकरें: झारखंड के विकी महतो ने श्री सीमेंट पर लगाए गंभीर आरोप
जमीन दी, नौकरी का वादा मिला, लेकिन अब दर-दर की ठोकरें: झारखंड के विकी महतो ने श्री सीमेंट पर लगाए गंभीर आरोप

 

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड स्थित रंगलबेड़ा गांव के निवासी विकी महतो ने राजस्थान आधारित सीमेंट निर्माता कंपनी श्री सीमेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विकी का दावा है कि उनके परिवार ने वर्षों पहले कंपनी को लगभग 5 एकड़ जमीन दी थी, जिसके बदले कंपनी ने उनके परिवार की दो पीढ़ियों को रोजगार देने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब जब उन्होंने नौकरी की मांग की, तो उन्हें कथित रूप से न केवल मना कर दिया गया बल्कि धमकियां भी दी गईं।

क्या है पूरा मामला?

विकी महतो के अनुसार, उनके दादा ने कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए लगभग 5 एकड़ जमीन दी थी। परिवार का कहना है कि उस समय प्रति एकड़ लगभग 2.5 लाख रुपये की दर से भुगतान किया गया था। साथ ही कंपनी की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि जमीन देने वाले परिवार की दो पीढ़ियों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

परिवार का आरोप है कि कंपनी ने वर्ष 2020 से रोजगार देने का वादा किया था। इसी क्रम में विकी के पिता को कंपनी में काम भी मिला और उन्होंने लगभग एक से दो वर्ष तक कार्य किया। हालांकि बाद में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से नौकरी छोड़ दी।

पिता के नौकरी छोड़ने के बाद बदला कंपनी का रुख?

विकी महतो का आरोप है कि उनके पिता के नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी ने एक समझौता पत्र तैयार कराया, जिसमें कहा गया कि भविष्य में नौकरी देने के बजाय आर्थिक सहायता दी जाएगी। लेकिन परिवार का दावा है कि न तो उन्हें कोई आर्थिक सहायता मिली और न ही समझौते की शर्तों का पालन किया गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विकी का कहना है कि समझौते में कहीं भी दूसरी पीढ़ी को नौकरी न देने का उल्लेख नहीं था। ऐसे में वह खुद को रोजगार पाने का वैध दावेदार मानते हैं।

"मैं दूसरी पीढ़ी का हक मांग रहा हूं" — विकी महतो

विकी महतो का कहना है कि वह केवल वही मांग कर रहे हैं जो उनके परिवार से किया गया वादा था।

उनके अनुसार, जब उन्होंने सरायकेला-खरसावां जिले के गुरुदीह गांव स्थित श्री सीमेंट प्लांट में नौकरी की मांग की, तो कंपनी के अधिकारियों ने कथित रूप से यह कहकर मना कर दिया कि उनके पिता ने बीच में नौकरी छोड़ दी थी, इसलिए अब परिवार के किसी अन्य सदस्य को रोजगार नहीं दिया जाएगा।

विकी ने आरोप लगाया कि उन्हें यह भी कहा गया कि यदि वह बार-बार कंपनी के पास आएंगे या इस मुद्दे को उठाएंगे तो उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा सकते हैं और उनका भविष्य खराब कर दिया जाएगा।

रोजगार और विस्थापन का पुराना सवाल

झारखंड में उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण और स्थानीय लोगों को रोजगार देने का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। कई इलाकों में जमीन दाताओं और विस्थापित परिवारों ने समय-समय पर कंपनियों पर रोजगार संबंधी वादों को पूरा न करने के आरोप लगाए हैं। हाल के वर्षों में सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में भी भूमि दाताओं द्वारा रोजगार और वेतन संबंधी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं।

कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस मामले में श्री सीमेंट की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि कंपनी की ओर से कोई स्पष्टीकरण या बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।

फिलहाल विकी महतो कि मांग केवल एक है—परिवार से किए गए रोजगार संबंधी वादे को पूरा किया जाए और उन्हें नौकरी दी जाए।

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    Vikash Kumar | पत्रकार व लेखक | Varta By Vikash Sahu

    Vikash Kumar एक स्वतंत्र पत्रकार और लेखक हैं, जो झारखंड और भारत से जुड़ी राजनीति, समाज, जनसमस्याओं और समसामयिक मुद्दों पर निष्पक्ष लेखन करते हैं।

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