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मार्कंडा यात्रा से पहले मूल–चामोर्शी मार्ग की मरम्मत की मांग, मनसे जिला सचिव किशोर मडगुलवार का प्रशासन को अल्टीमेटम
चंद्रपूर/गडचिरोली:
विदर्भ की काशी के नाम से प्रसिद्ध मार्कंडा देवस्थान में आगामी महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर 10 फरवरी 2026 से 15 दिवसीय भव्य यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थस्थल पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हालांकि, यात्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मूल–चामोर्शी मार्ग की हालत बेहद खराब हो चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और जर्जर स्थिति यात्रियों के लिए खतरा बन गई है। इसी गंभीर समस्या को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के जिला सचिव किशोर मडगुलवार के नेतृत्व में चंद्रपूर एवं गडचिरोली के जिलाधिकारियों को एक औपचारिक निवेदन (मांग पत्र) सौंपा गया है।
सड़क की बदहाली से बढ़ा हादसों का खतरा
निवेदन में स्पष्ट किया गया है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
यात्रा के दौरान भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो श्रद्धालुओं की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
प्रशासन से सीधा सवाल — जिम्मेदारी किसकी होगी?
मनसे ने प्रशासन से सवाल उठाया है कि यदि खराब सड़क के कारण कोई दुर्घटना या जानमाल की हानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
निवेदन में मांग की गई है कि सड़क मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर तुरंत शुरू कर यात्रा से पहले पूरा किया जाए।
10 फरवरी से पहले कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
किशोर मडगुलवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि
यदि 10 फरवरी 2026 से पहले मूल–चामोर्शी मार्ग की मरम्मत पूरी नहीं हुई, तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपने पारंपरिक “मनसे स्टाइल” में उग्र आंदोलन शुरू करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा को सुगम बनाना है, न कि प्रशासन से टकराव करना। लेकिन यदि जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन अनिवार्य होगा।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने भी सड़क की खराब स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हर वर्ष हजारों भक्त इस मार्ग से होकर मार्कंडा पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षित और बेहतर सड़क सुविधा प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले सड़क की मरम्मत होती है या मामला आंदोलन की ओर बढ़ता है।

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