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चंद्रपुर | विशेष रिपोर्ट : महाऔष्णिक विद्युत केंद्र (CSTPS) के वरिष्ठ अधिकारी विजय राठोड़ पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अब मामला नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। जहां एक ओर कुछ राजनीतिक और व्यक्तिगत हितों से प्रेरित तत्वों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने इन आरोपों को निराधार, समय-चयनित और तथ्यहीन करार दिया है।
सूत्रों के अनुसार, विजय राठोड़ के कार्यकाल के दौरान चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन ने अपने लगभग 40 वर्षों के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। पहले जहां उत्पादन क्षमता 1500–1600 मेगावाट तक सीमित थी, वहीं हाल के महीनों में यह क्षमता बढ़कर लगभग 2700 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो कि एक बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक उपलब्धि मानी जा रही है।
आरोपों की पर सवाल
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आरोपों की टाइमिंग संदिग्ध है। विशेष रूप से यह तथ्य सामने आया है कि ये आरोप ऐसे समय पर उछाले गए हैं, जब संस्थान लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और विभागीय सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक सुनियोजित प्रयास हो सकता है, जिसका उद्देश्य एक ईमानदार अधिकारी की छवि को धूमिल करना है।
विभागीय सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका
विभागीय सूत्रों का कहना है कि विजय राठोड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान—
• विद्युत उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि कराई
• मेंटेनेंस सिस्टम को मजबूत किया
• संसाधन प्रबंधन को बेहतर बनाया
• वित्तीय घाटे को कम करने में अहम भूमिका निभाई
• प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाया
पिछले एक वर्ष में विद्युत केंद्र का लगभग 800 करोड़ रुपये का घाटा कम किया गया, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
Technical Assistant को लेकर फैलाई गई भ्रांति
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में एक Technical Assistant विकी राठोड़ का नाम भी अनावश्यक रूप से घसीटा गया। शैक्षणिक रूप से तकनीकी सहायक विकी राठोड़ एक योग्य अभियंता हैं, जिन्होंने NPTI से थर्मल पावर सेक्टर में शिक्षा प्राप्त की है, एनर्जी मैनेजमेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया है तथा वर्तमान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे हैं; साथ ही कंपन विश्लेषण (Vibration Analysis) के क्षेत्र में उनकी तकनीकी विशेषज्ञता मानी जाती है, हालांकि इस प्रकरण में उनकी भूमिका केवल तकनीकी सहायक स्तर तक ही सीमित रही है।
वरिष्ठ अधिकारी विजय राठोड़ से केवल उपनाम (surname) समान होने के कारण दोनों को जोड़कर एक भ्रामक कहानी गढ़ने का प्रयास किया गया, जो तथ्यों से परे है और जिसका उद्देश्य केवल बदनाम करना प्रतीत होता है।
आरोप निराधार, जांच से सच आएगा सामने
बिजली विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि विजय राठोड़ ने हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के तहत निर्णय लिए और किसी भी प्रकार के अनावश्यक दबाव को स्वीकार नहीं किया। यही कारण हो सकता है कि कुछ असंतुष्ट और स्वार्थी तत्व अब उन्हें निशाना बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है और निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया जारी है। विभागीय अधिकारियों को भरोसा है कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, और यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोप केवल बदनाम करने की साजिश थे।
ऊर्जा क्षेत्र में सकारात्मक पहचान
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि विजय राठोड़ जैसे अधिकारी किसी भी संस्थान की रीढ़ होते हैं, जो दबाव में आए बिना कार्य करते हैं और परिणाम आधारित प्रशासन को प्राथमिकता देते हैं। उनके नेतृत्व में CSTPS ने न केवल उत्पादन में सुधार किया, बल्कि तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता में भी नया मानक स्थापित किया है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह पूरा मामला शिकायतकर्ता की तकनीकी ज्ञान की कमी, पावर इंडस्ट्री की जटिल इंजीनियरिंग को न समझ पाने, तथा विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से दबाव और ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति के कारण उत्पन्न गलतफहमी का परिणाम हो सकता है।
यदि वास्तव में इतना व्यापक भ्रष्टाचार हो रहा होता, तो चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र में रिकॉर्ड-तोड़ विद्युत उत्पादन और ऐतिहासिक प्रदर्शन संभव नहीं होता।
जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी, लेकिन वर्तमान उपलब्धियां, विभागीय रिकॉर्ड और तकनीकी परिणाम यह संकेत देते हैं कि विजय राठोड़ पर लगाए गए आरोप जल्द ही निराधार सिद्ध हो सकते हैं।

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