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बल्लारपूर (जिला चंद्रपूर) से आशीष खरोले की रिपोर्ट : बल्लारपूर विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में मंदिर निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण महिलाओं और नागरिकों ने कड़ा रुख अपनाया है। गांव की महिलाओं का कहना है कि यदि लंबे समय से लंबित मंदिर निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगी।
यह मांग सीधे तौर पर बल्लारपूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार से की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
“आस्था का सवाल है, राजनीति का नहीं” — ग्रामीण महिलाओं की दो टूक
गांव की एक नागरिक महिला ने कहा,
“हम कई वर्षों से मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं। यह हमारी आस्था से जुड़ा विषय है। अगर हमारी आवाज नहीं सुनी गई, तो हम चुनाव में वोट नहीं डालेंगे।”
महिलाओं का कहना है कि गांव में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के लिए एक स्थायी मंदिर की अत्यंत आवश्यकता है। वर्तमान में श्रद्धालुओं को अस्थायी या दूरस्थ स्थलों पर जाना पड़ता है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी होती है।
स्थानीय जनता की सामूहिक मांग — मंदिर बने या वोट बंद
ग्रामीण नागरिकों का कहना है कि यह केवल महिलाओं की नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक मांग है। लोगों का मानना है कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा वादे तो किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन वादों को पूरा नहीं किया जाता।
अब ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं हुई, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।
यह चेतावनी क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
विधायक सुधीर मुनगंटीवार से जल्द निर्णय की अपेक्षा
ग्रामीणों को उम्मीद है कि विधायक सुधीर मुनगंटीवार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे। नागरिकों का कहना है कि यह मामला केवल एक भवन निर्माण का नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस मांग को पूरा किया गया, तो इससे न केवल जनता का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द भी बढ़ेगा।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से अहम मुद्दा
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक और सामाजिक मुद्दे जनता की भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं। यदि इस प्रकार की मांगों को अनदेखा किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
अब देखना यह है कि विधायक और प्रशासन इस विषय पर कितनी शीघ्रता और गंभीरता से कदम उठाते हैं।

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