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चंद्रपुर स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय (प्रादेशिक) के सामने वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं में सरकारी धन का दुरुपयोग, फर्जी मजदूरी भुगतान और रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोपण कार्यों और नर्सरी प्रबंधन से जुड़े मामलों में ऐसे लोगों के नाम मजदूरों की सूची में दर्ज किए गए, जो वास्तव में काम पर उपस्थित नहीं थे। इसमें गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति, दिव्यांग नागरिक, आंगनवाड़ी सेविका, टेम्पो चालक और अन्य अपात्र नाम शामिल बताए गए हैं, जिससे सरकारी निधि का गलत उपयोग हुआ।
इसके अलावा, भंडार प्रकरण में भ्रष्टाचार, लंबित मजदूरी भुगतान, फर्जी रोपण कार्य, बोगस मजदूरों के नाम पर निकाली गई राशि की वसूली, तथा लकड़ी परिवहन से जुड़े खर्चों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, निलंबन और कानूनी कदम उठाए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
धरना स्थल पर स्थानीय नागरिकों, मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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